नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अब तक नेपाल और तिब्बत में कुल 210 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में 207 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में 3 लोगों के मारे जाने की जानकारी दी गई है। राहत और बचाव एजेंसियां खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं।
300 से ज्यादा भारतीयों के लापता होने की जानकारी
नेपाल में 900 से ज्यादा लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। इनमें 32 देशों के करीब 525 विदेशी पर्यटक भी शामिल बताए गए हैं।
दिए गए विवरण के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक शामिल हैं।
इस बीच नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे क्षेत्र से 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें 95 नेपाली नागरिक और 21 भारतीय नागरिक बताए गए हैं।
तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता
नेपाल के अलावा तिब्बत में भी बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV के अनुसार, तिब्बत में 550 से ज्यादा लोगों का अभी तक सुराग नहीं मिल पाया है।
राहत एवं बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती खराब मौसम और कई स्थानों पर संपर्क मार्गों के बाधित होने की है।
भूस्खलन से आया 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की ओर से इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था।
हालांकि, बाद में सामने आया कि पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। इसी बड़े भूस्खलन से इलाके में भूकंप जैसी तेज कंपन महसूस हुई।
ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
दिए गए विवरण के अनुसार, बाद में USGS ने भी स्पष्ट किया कि करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस हुआ झटका भूस्खलन के कारण उत्पन्न हुआ था।
मलबे से बनी झील ने बढ़ाई चिंता
भूस्खलन के बाद जमा हुए मलबे से इलाके में एक झील के बनने की जानकारी सामने आई है। चीन के सरकारी टीवी चैनल CCTV की ड्रोन फुटेज में भी भूस्खलन वाली जगह पर पानी का बड़ा क्षेत्र दिखाई दे रहा है।
बताया गया है कि यह झील ग्यिरोंग पोर्ट के पास नेपाल की तरफ बनी है और इसका आकार लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और पानी किनारों से बाहर निकलने लगा है। अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान बताया गया है।
मलबे का बांध टूटने का खतरा
झील के लगातार बढ़ते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि पानी के दबाव से झील को रोकने वाला मलबे का प्राकृतिक बांध टूट सकता है।
अगर ऐसा होता है तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है, जिससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है और लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ संभावित बाढ़ के खतरे पर भी नजर रखी जा रही है


