🔥 Hot Deals Today: Shop Online on Myntra | Flipkart Special Offers | 🎧 Aroma NB121 Pods – 76% OFF | 📢 Share Your Press Release with Rashtra View: 📱 WhatsApp | 📧 Email: viewrashtra@gmail.com

हनुमान चालीसा: शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत स्रोत

Rashtra View
0


 📰 राष्ट्र व्यू (Rashtra View)

हनुमान चालीसा: शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत स्रोत

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में Hanuman जी की भक्ति को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। उन्हीं की महिमा का वर्णन करने वाली हनुमान चालीसा आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा है। इसे महान संत Tulsidas द्वारा रचा गया था, जो भक्ति और शक्ति का अनोखा संगम है।

📖 क्या है हनुमान चालीसा?

हनुमान चालीसा 40 चौपाइयों का एक पवित्र स्तोत्र है, जिसमें भगवान हनुमान के गुण, पराक्रम और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन किया गया है। इसे नियमित पढ़ने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

🌟 हनुमान चालीसा के प्रमुख लाभ

🛡️ नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

💪 साहस और आत्मबल में वृद्धि

🧠 मानसिक तनाव और भय में कमी

✨ जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता

🕉️ कब और कैसे करें पाठ?

सुबह या शाम शांत वातावरण में पाठ करना शुभ माना जाता है

मंगलवार और शनिवार विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं

श्रद्धा और विश्वास के साथ नियमित पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है

📜 हनुमान चालीसा 


श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुर सुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुण्डल कुँचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।
कांधे मूंज जनेउ साजे।।

शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन।।

बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचन्द्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानु।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूतपिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरे सब पीरा।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकन्दन राम दुलारे।।

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुह्मरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै।।

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बन्दि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।



🔎 निष्कर्ष

हनुमान चालीसा केवल एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि जीवन में साहस, विश्वास और सकारात्मकता लाने का माध्यम है। नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक संतुलन और आत्मबल दोनों मजबूत होते हैं।

Post a Comment

0 Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept) #days=(20)

Rashtra View uses cookies to improve your browsing experience and to show relevant ads. By clicking Accept, you agree to our use of cookies. Learn More

Accept
To Top