Rashtra View | अंतरराष्ट्रीय राजनीति
ईरान युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी संसद में रक्षा मामलों को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। Pete Hegseth ने हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के सामने पेश होकर सांसदों के सवालों का जवाब दिया। इस दौरान डेमोक्रेटिक सांसद Ro Khanna ने युद्ध से जुड़े खर्च और नीतियों पर सरकार को घेरा।
करीब छह घंटे तक चली इस सुनवाई में रक्षा मंत्री ने शपथ के तहत सवालों का सामना किया। उनके साथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन General Dan Kane और रक्षा मंत्रालय के मुख्य वित्त अधिकारी Jules Hurst भी मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान डेमोक्रेटिक सांसदों ने विशेष रूप से युद्ध में हुए भारी खर्च को लेकर चिंता जताई। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक अमेरिका इस संघर्ष पर लगभग 25 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि का बड़ा हिस्सा हथियारों और सैन्य उपकरणों की मरम्मत व पुनर्स्थापना पर लगाया गया है।
हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध की कुल लागत का अंतिम आकलन अभी बाकी है और आने वाले समय में विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी।
इस बहस ने एक बार फिर अमेरिका की विदेश नीति, रक्षा खर्च और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सुनवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है, जिससे सरकार की नीतियों पर पारदर्शिता बनी रहती है।
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