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देहरादून: उत्तराखंड में समाज कल्याण विभाग से जुड़ा एक बड़ा पेंशन घोटाला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Pushkar Singh Dhami अब इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लेने वाले हैं, जिससे हजारों मामलों का भविष्य तय होगा।
🔍 जांच में क्या हुआ खुलासा?
सरकार द्वारा गठित जांच समिति ने 1377 संदिग्ध मामलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है।
653 लोगों ने फर्जी आय प्रमाणपत्र के आधार पर दोहरी पेंशन ली
कई लोग पहले से सरकारी पेंशनभोगी होते हुए भी दूसरी योजनाओं का लाभ उठा रहे थे
565 मामले राज्य आंदोलनकारी आश्रित कोटे से जुड़े पाए गए
यह खुलासा राज्य में पेंशन वितरण प्रणाली की निगरानी पर गंभीर सवाल उठाता है।
💰 16.8 करोड़ की वसूली की सिफारिश
जांच रिपोर्ट में अवैध रूप से ली गई लगभग 16.8 करोड़ रुपये की राशि की वसूली करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही, बिना उचित सत्यापन के आय प्रमाणपत्र जारी करने वाले तहसील स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिन पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
🛑 पहले ही रोकी गई पेंशन
समाज कल्याण विभाग ने संदिग्ध खातों की पेंशन पहले ही रोक दी है और संबंधित लाभार्थियों से शपथ पत्र मांगे गए हैं | Sridhar Babu Addanki ने बताया कि रिपोर्ट का परीक्षण जारी है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री को अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा।
⚖️ अब नजर CM के फैसले पर
पूरे मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा, जिससे यह तय होगा कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी और वसूली की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितताओं को उजागर करता है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
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