साल 2025 अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने को है। एक ओर यह वर्ष भारत के लिए गौरव, विज्ञान और सामर्थ्य का प्रतीक बना, तो दूसरी ओर इसी साल ने देश को ऐसी पीड़ाएँ दीं, जिन्हें भुला पाना आसान नहीं होगा।
नए साल 2026 की दहलीज़ पर खड़ा भारत जब पीछे मुड़कर देखता है, तो तस्वीर दो रंगों में दिखाई देती है—उपलब्धियों की चमक और त्रासदियों का गहरा साया।
2025 में भारत ने विश्व को अपनी सांस्कृतिक विरासत, वैज्ञानिक क्षमता और सामरिक ताकत का एहसास कराया। महापर्व महाकुंभ ने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा, भारतीय बेटियों की खेल उपलब्धियों ने गर्व बढ़ाया और विज्ञान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान बने। लेकिन इन्हीं सफलताओं के बीच कई ऐसी घटनाएँ भी घटीं, जिन्होंने देश को गहरे ज़ख़्म दिए।
महाकुंभ की भीड़ और एक दर्दनाक हादसा
जनवरी 2025 में 144 वर्षों बाद आयोजित महाकुंभ ने भारत की आस्था और परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।
लेकिन इसी आयोजन के दौरान प्रयागराज में 29 जनवरी को एक दुखद हादसा हुआ। भारी भीड़ के दबाव में बैरिकेडिंग टूटने से भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और अनेक घायल हुए। आस्था के इस पर्व पर आई यह त्रासदी कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला घाव बन गई।
रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़
महाकुंभ के बाद फरवरी 2025 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन की कमी एक बार फिर सामने आई। प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों के इंतज़ार में प्लेटफार्म पर भारी भीड़ जमा थी।
ट्रेन देरी और प्लेटफार्म बदलने की अफवाह ने स्थिति को और बिगाड़ दिया, जिसके बाद भगदड़ मच गई। इस हादसे में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।
आतंकी हमला और देश की सुरक्षा चुनौती
साल 2025 में सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा। अप्रैल महीने में पहलगाम में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला देश के लिए एक गहरा आघात था।
इस हमले में कई लोगों की जान गई और देशभर में दहशत का माहौल बन गया। हालांकि, इसके बाद भारत ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए आतंक के खिलाफ कड़ा संदेश दिया और अपनी सुरक्षा नीति की दृढ़ता को दुनिया के सामने रखा।
जश्न से मातम और विमान हादसे की त्रासदी
जून 2025 को शायद ही कोई भारतीय भूल पाए। खेल के जश्न के दौरान एक शहर में मची भगदड़ ने खुशी को पलभर में मातम में बदल दिया।
इसी महीने अहमदाबाद में एक बड़ा विमान हादसा भी हुआ, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। टेक-ऑफ के कुछ ही समय बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा इतना भयावह था कि इसकी याद आज भी लोगों को सिहरने पर मजबूर कर देती है।
2025 से मिलने वाली सीख
साल 2025 हमें यह सिखाकर जा रहा है कि उपलब्धियाँ तभी सार्थक हैं, जब सुरक्षा, व्यवस्था और संवेदनशीलता को समान महत्व दिया जाए।
भीड़ प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा, आपदा नियंत्रण और समय पर सही निर्णय—ये ऐसे पहलू हैं, जिन पर भविष्य में और गंभीरता से काम करने की ज़रूरत है।
भारत ने 2025 में बहुत कुछ पाया, लेकिन बहुत कुछ खोया भी। यही कारण है कि यह साल केवल उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि उन सबक़ों के लिए भी याद रखा जाएगा, जो आने वाले वर्षों को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

