स्टाफ रिपोर्ट | Rashtra View
तेजी से विकसित हो रहे हिमाचल प्रदेश के घुमारवीं शहर में टैक्सी ऑपरेटरों की एक पुरानी समस्या अब और गंभीर होती जा रही है। करीब दो दशकों से टैक्सी संचालक स्थायी टैक्सी स्टैंड की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
इसका सीधा असर न केवल टैक्सी चालकों पर पड़ रहा है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
एनएच किनारे खड़ी करनी पड़ रही टैक्सियां
शिवा टैक्सी ऑपरेटर यूनियन घुमारवीं ने बताया कि वर्तमान में टैक्सियों को शिमला–मटौर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे खड़ा करना मजबूरी बन चुका है। इससे अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और पुलिस व प्रशासन के साथ भी असहज हालात पैदा हो जाते हैं।
टैक्सी चालकों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था के लिए भी उन्हें लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा, लेकिन स्थायी टैक्सी स्टैंड की मांग आज तक अधूरी है।
100 परिवारों की आजीविका दांव पर
यूनियन के अनुसार, घुमारवीं में करीब 90 टैक्सियां पंजीकृत हैं और इस व्यवसाय से जुड़े लगभग 100 परिवार पूरी तरह टैक्सी संचालन पर निर्भर हैं।
स्थायी टैक्सी स्टैंड न होने के कारण चालकों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे समय, ईंधन और संसाधनों की बर्बादी होती है। इसका असर यात्रियों की सुविधा पर भी पड़ता है।
मंत्री से की गई स्थायी समाधान की मांग
शिवा टैक्सी यूनियन के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को लेकर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी से मुलाकात कर पुल के समीप स्थायी टैक्सी स्टैंड के निर्माण की मांग रखी है।
यूनियन प्रधान सुरेश शर्मा ने कहा कि एनएच किनारे टैक्सियां खड़ी करने से दुकानदारों के साथ भी कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है, जिसे स्थायी टैक्सी स्टैंड बनाकर आसानी से सुलझाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों को भी है उम्मीद
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि घुमारवीं में एक सुनियोजित और स्थायी टैक्सी स्टैंड का निर्माण होता है, तो इससे न केवल टैक्सी चालकों को राहत मिलेगी बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सकेगी।
अब टैक्सी यूनियन को उम्मीद है कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द कोई ठोस निर्णय लेगी।


