छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल सामने आई है। उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने कवर्धा स्थित विधायक कार्यालय में पुस्तक ‘द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव – राजा भोरमदेव की कहानी’ का विधिवत विमोचन किया।
इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक के लेखक रामप्रसाद बघेल को बधाई देते हुए कहा कि यह कृति न केवल जिले के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।
सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास
विजय शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक महान शासक राजा भोरमदेव के जीवन, विचार और मूल्यों को रोचक कथा के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इससे नई पीढ़ी को अपने इतिहास और सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह रचना भोरमदेव की ख्याति को राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर ले जाकर वैश्विक मंच तक पहुँचाने में सफल होगी।
इतिहास के साथ दर्शन और चेतना का संगम
उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पुस्तक केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मनुष्य, प्रकृति और चेतना के बीच संतुलन की गहरी दार्शनिक अवधारणा को प्रभावशाली ढंग से पिरोया गया है। यह पाठकों को सोचने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।
लेखक ने साझा की कथा की विशेषताएं
लेखक रामप्रसाद बघेल ने बताया कि कथा की शुरुआत एक रहस्यमयी प्राचीन युग से होती है, जहाँ एक विशाल धूमकेतु के आगमन से पृथ्वी का संतुलन बिगड़ जाता है। इसी पृष्ठभूमि में विज्ञान, अध्यात्म और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक नायक उभरता है।
कहानी में राजा परसमनिधर देव, रानी नागमती, तपस्या, दिव्य-वैज्ञानिक शक्तियाँ, पारस रत्न और नागमणि यंत्र जैसे तत्वों के माध्यम से जीवन, प्रेम और नियति का गहन चित्रण किया गया है।
यह पुस्तक युद्ध से अधिक चेतना, प्रेम और संतुलन की कथा है, जो पाठकों को एक नई दृष्टि और सकारात्मक सोच प्रदान करती है।


