पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के विरोध में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। इस दौरान वह काली शॉल ओढ़े नजर आईं, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के साथ हो रही कथित नाइंसाफी का प्रतीक बताया।
ममता बनर्जी के साथ SIR से प्रभावित 13 परिवारों के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।
“यह चुनाव आयोग नहीं, भाजपा का आईटी सेल है”
बैठक के बाद ममता बनर्जी ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि चुनाव लोकतंत्र का उत्सव होते हैं, लेकिन SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल के हित में लिया गया फैसला है। ममता ने कहा कि वह संवैधानिक पदों का सम्मान करती हैं, लेकिन लोकतंत्र से समझौता स्वीकार नहीं करेंगी।
बंगाल को निशाना बनाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि बार-बार पश्चिम बंगाल को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर देश में कोई इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाएगा, तो वह और उनकी पार्टी यह लड़ाई जारी रखेंगी।
बैठक का बहिष्कार, इंसाफ की मांग
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह न्याय की उम्मीद लेकर दिल्ली आई थीं, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। इसी वजह से उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में मतदाता ही सबसे बड़ी ताकत है और किसी भी तरह से उनके अधिकारों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

